नैनागिरि के दाऊ का शिक्षा जगत में अनोखा योगदान
हम सभी के आदरणीय श्री सुरेश जैन आईएएस का जन्म बुन्देलखण्ड के छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील अंतर्गत ग्राम नैनागिरि की पावन भूमि पर श्री सतीश चंद्र ,श्रीमती केशर देवी जैन के आंगन में प्रथम सुपुत्र के रूप में हुआ है। आप बाल्य काल से ही प्रतिभा के धनी रहे है। प्राथमिक शिक्षा नैनागिरि की पाठशाला में हुई, हायर सेकेण्डरी मोराजी सागर से,उच्च शिक्षा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से प्राप्त की। प्रत्येक कक्षा और डिग्री में प्रथम स्थान तथा गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। कहावत- पूत के गुण पालने में दिखते हैं को चरितार्थ करते हुए आपने प्रथम प्रयास में एमपी पीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया।
आप मप्र के तीन जिलों में कलेक्टर के पद पर आसीन रहे , प्रदेश और जिला के प्रशासनिक मुख्य पदों पर विराजमान रहकर नैनागिरि तथा समीपस्थ ग्रामों के अवश्यकता बाले सैकड़ों लोगों को रोजगार दिलाने तथा हरिजन आदिवासी व पिछड़े वर्ग के लोगों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
शिक्षा विभाग में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल में संचालक के पद पर आसीन हुए। आपने नैनागिरि के शासकीय प्राथमिक विद्यालय को माध्यमिक शाला के रूप में उन्नयन किया जिससे सैकड़ों छात्रों को कक्षा आठवीं पास करने का मौका मिलने लगा। आपके पिताजी श्री सतीश चंद्र जी व माता श्रीमती केशर देवी जी ने नैनागिरि विकास में अमूल्य योगदान देकर पूरा जीवन समर्पित किया है। शिक्षा के साथ ही नैनागिरि क्षेत्र परिधि के चारों ओर के स्वास्थ्य आवागमन रोजगार सिंचाई तथा न्याय के क्षेत्र में आप समर्पित रहे वहीं आपकी धर्मपत्नी न्यायमूर्ति श्रीमती विमला जी जैन द्वारा बकस्वाहा में न्यायालय स्थापित करवाकर क्षेत्रीय ग्रामीणों को न्याय दिलाने में महति भूमिका रहीं ।
परम सम्मानीय सतीश चंद्र जी के देहावसान पर परिवार के सभी सदस्य तथा इष्ट मित्रों ने एक नेक विचार बनाया कि पिताजी के नाम से विद्यालय का शुभारंभ किया जाय। सभी ने मिलकर ऐसे ज्ञान मंदिर का शुभारंभ किया कि 25 किमी की दूरी तक हायर सेकेण्डरी स्कूल नहीं हुआ करता था। नैनागिरि की पावन पुनीत भूमि पर सिंघई सतीश चंद्र केशर देवी जैन उ मा विद्यालय की स्थापना बर्ष 1993 में की गई। जिसके संचालन आदि का भार श्री सुरेंद्र जैन प्राचार्य, श्री दिनेश सेठ , श्री राजेश जैन "रागी" (वरिष्ठ पत्रकार) बकस्वाहा , श्री माणिक चंद्र जी, श्री कन्छेदी लाल जैन, श्री शिखर चंद्र जैन के लिए दिया गया। सतत सहयोग श्री रघुवर प्रसाद जी डेवडिया अध्यक्ष प्रबंध समिति , श्री दामोदर सेठ मंत्री ट्रस्ट एवं नैनागिरि क्षेत्र कमेटी के सभी पदाधिकारी, सदस्यों तथा सामाजिक बंधुओं ने किया।
इस विद्यालय में प्रथम बर्ष में ही लगभग तीस ग्रामों तथा चार जिलों के 58 छात्रों ने प्रवेश लिया। इन छात्रों को चहुंमुखी विकास का ध्यान रखते हुए योग्य अनुभवी शिक्षक श्री बी एल पटेल, श्री एम आर विश्वकर्मा, श्री देवेंद्र जैन, श्री पी सी जैन, मणि चंद्र जैन रागी, राजेन्द्र कुमार जैन, श्रीमती रजनी जैन, श्री तुलसीदास बिल्थरे , बी एस ठाकुर, कपूरे सिंह लोधी सहित अनेक शिक्षकों ने अपना पूर्ण समय न्योछावर कर उज्ज्वल भविष्य हेतु नेक उपाय निकालकर अध्यापन कार्य किया।
सहायक प्राध्यापक, प्रशानिक पद, पुलिस विभाग, वनविभाग, शिक्षक, सचिव, सरपंच, पत्रकार,सैनिक, उद्योगपति, तकनीकी बाली कृषि, पशुपालन, ग्रंथपाल, एल आई सी, पटवारी, बैक ,उन्नत किस्म के फल के बाग आदि कोई भी पद शेष नहीं है।
सिंघई परिवार के प्रत्येक सदस्य हितेषी, रिश्तेदार सभी ने अपना तन, मन, धन से सहयोग करके ज्ञानमयी गंगा में अपना योगदान की आहूति दी। ऐसे परिवारों ने विद्यालय में अध्ययन करके उच्चतम सफलता प्राप्त की है जो कभी सपने में भी नहीं सोच सकते थे।
कहा जाता है कि प्रत्येक सफल व्यक्ति की सफलता में किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। हमारे ग्राम के दाऊ की सफलता में उनकी पत्नि न्यायमूर्ति श्रीमती विमला जी जैन ने कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया है, उनके सभी भाई, सुपुत्र, सुपुत्री, बहुएं, रिश्तेदारों की बहुत ही सराहनीय भूमिका रही है। समूचा क्षेत्र आज आदरणीय सर जी को महापुरुष का रूप देकर नतमस्तक है, बच्चों को आगे बढ़ाने में आपके समूचे परिवार का बहुत ही सराहनीय योगदान है।
आज 17 अक्टूबर को आपके 81वें जन्मदिवस पर तीर्थराज नैनागिरि सेवक प्राचार्य सुमति प्रकाश के मन के उदगार सादर सम्प्रेषित है। आप सपरिवार सदा स्वस्थ्य प्रशन्न दीर्घायु रहें ऐसी कामना बड़े बाबा पारस प्रभू से करता हूँ।




